वीराना

    वीराना छाया है हर ओर कि आहट सुनाई देती नहीं कोई वो ज़ोर ख़रोश भरी आवाज़ें ना जाने है कहाँ खोई।

क़यामत

      हया तो गहना है औरत का नज़रों से मगर क़यामत वो ढाती है दुनिया की हसरत भरी निगाहों को अपने दामन में चुपके से समाती है

बाप्पा

    तू है मेरी वंदना मेरी हर मुराद तू है और मेरे हर नए आग़ाज़ का अंजाम तू है दुआ क़बूल हो जाए जो तेरे दर पर...

कान्हा

    जब भी मुझे तेरी याद आई कान्हा तेरी बांसुरी की धुन कर गई दीवाना छोड़ लोग लाज मैं दौड़ी चली आई बचपन की सखियाँ भी हुई पराई

मेरे दिल के अल्फ़ाज़

कभी-कभी दिल की गहरी भावनाओं को कुछ शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है।आपको अपने ख्यालों को व्यक्त करने के लिए लंबी कविता लिखने...

गुफ्तगू

    चल पड़ें हैं राह पुरानी कुछ लम्हें निकाल के और जी रहे हैं आज हम फिर कुछ पल सुकून के कहने को थी कितनी बातें पर...

सिंगार

      पहन कर ये गहने कर लिया है सिंगार और नहीं होता अब पी का इंतेज़ार ताक रहे हैं राहे मन हो चला अब बेचैन क्यूँकि करने लगेंगे...

सिंदूरी टीका

    माथे पर दमके सिंदूरी टीका और अँख़ियों में फैल गया कजरा हाथों में है पी तेरे नाम की मेहंदी और बालों में सजा जूही का गजरा

उम्मीद की लौ

    झुकी हुई हैं नज़रें आज इंतेज़ार में तेरे डर हैं कहीं धड़कनें थम ना जाएँ उम्मीद की लौ मगर बुझने नहीं देंगे इंतेज़ार की घड़ियाँ शायद पल...

खोया हुआ वक़्त

      ना जाने किसका मुझे इंतेज़ार है और ज़िंदगी क्यूँ इस क़दर बेज़ार है लौट कर आएगा खोया हुआ वक़्त है यक़ीं फ़िज़ाओं में देखो छाया फिर खुमार...

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